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Ganpati Ji Ki Aarti

गणपति आरती — गणपति की सेवा मंगल मेवा

Aarti · आरतीLord Ganpati · विघ्नहर्ता~5 min read
गणपति आरती — Ganpati Ji Ki Aarti

Lyrics in Hindi

गणपति की सेवा मंगल मेवा, सेवा से सब विघ्न टरें।
तीन लोक तैंतीस देवता द्वार खड़े सब अर्ज करे॥

ऋद्धि-सिद्धि दक्षिणबाम विराजे, अरु आनन्द सौं चंवर ढुरें।
धूप दीप और लिए आरती, भक्त खड़े जयकार करें॥

गुड़ के मोदक भोग लगत हैं, मूषक वाहन चढ़या करें।
सौम्यरुप सेवा गणपति की, विघ्न भाग जा दूर परें॥

भादों मास शुक्ल चतुर्थी, दिन दोपहर पूरा परें।
लियो जन्म गणपति प्रभुजी ने, दुर्गा मन आनन्द भरें॥

श्री शंकर के आनन्द उपज्यों, नाम सुनें सब विघ्न टरें।
आन विधाता बैठे आसन, इन्द्र अप्सरा नृत्य करें॥

देखत वेद ब्रह्माजी जाको, विघ्न विनाशन नाम धरें॥
एकदन्त गजबदन विनायक, त्रियनयन रूप अनूप धरें॥

पग खम्बा सा उदर पुष्ट है, देख चन्द्रमा हास्य करें।
दे शाप चन्द्रदेव को, कलाहीन तत्काल करें॥

चौदह लोक में फिरें गणपति, तीन भुवन में राज करें।
उठि प्रभात जो आरती गावे, जाके सिर यश छत्र फिरें॥

गणपति जी की पूजा पहले करनी, काम सभी निर्विघ्न करें॥
श्री प्रताप गणपति जी का, हाथ जोड़कर स्तुति करें॥

About Ganpati Ji Ki Aarti: This ancient Aarti describes Lord Ganesha's birth on Bhadrapada Shukla Chaturthi (Ganesh Chaturthi), his divine form with one tusk, elephant head and three eyes, and his glory as the remover of all obstacles. He is always worshipped first before all other deities.

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