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Jagdish Aarti

जगदीश आरती — ॐ जय जगदीश हरे

Aarti · आरतीLord Jagdish · विष्णु~5 min read
जगदीश आरती — Om Jai Jagdish Hare

Lyrics in Hindi

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुःख विनसे मनका।
सुख-सम्पति घर आवे, कष्ट मिटै तन का॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय! तुमको मैं कुमति॥

दीनबन्धु दुःखहर्ता, तुम रक्षक मेरे।
अपने हाथ बढ़ाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

तन, मन, धन सब कुछ है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥

श्री जगदीश जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख सम्पति पावे॥

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्।
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्।
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

About Jagdish Aarti: Om Jai Jagdish Hare is one of the most universally sung aartis in Hindu households, offered to Lord Vishnu as the Lord of the Universe (Jagdish). It expresses complete surrender to the Lord and is accompanied by a beautiful Vishnu shloka.

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