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Navratri Pooja

नवरात्रि पूजा व कलश स्थापना विधि

Pooja · पूजाGoddess Durga · नवदुर्गा~10 min read
नवरात्रि पूजा विधि — Navratri Puja Procedure

Lyrics in Hindi

कलश स्थापना (घटस्थापना):
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है। मिट्टी के बर्तन में जौ (जवारे) बोएं। एक तांबे या मिट्टी के कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का और दूर्वा डालकर उसे लाल कपड़े से लपेटे हुए नारियल और आम के पत्तों से सजाएं। इसे जौ वाले बर्तन के बीच में स्थापित करें।

नवदुर्गा के नौ स्वरूप:
नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है: १. शैलपुत्री, २. ब्रह्मचारिणी, ३. चंद्रघंटा, ४. कुष्मांडा, ५. स्कंदमाता, ६. कात्यायनी, ७. कालरात्रि, ८. महागौरी, ९. सिद्धिदात्री।

दैनिक पूजा विधि:
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। माता की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीपक प्रज्वलित करें। माता को लाल पुष्प, रोली, अक्षत, सिन्दूर और चुनरी अर्पित करें। प्रतिदिन दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में 'जय अम्बे गौरी' आरती गाएं और माता को हलवा, पूरी और चने का भोग लगाएं (विशेषकर अष्टमी और नवमी के दिन)।

कन्या पूजन:
अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं (जिन्हें देवी का स्वरूप माना जाता है) को भोजन कराएं, उनके पैर धोएं और उन्हें दक्षिणा व उपहार देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।